माता कात्यायनी, दुर्गतिनाशिनी माता दुर्गा का षष्ठ रूप एवं महात्म्य। Mata Katyani

श्री गणेशाय नमः। श्रीगायत्री नमः। श्री गुरुवे नमः।

दुर्गतिनाशिनी माता दुर्गा का षष्ठ रूप कात्यायनी महात्म्य ।

माता दुर्गा की आराधना करने पर धर्म अर्थ काम मोक्ष का वरदान सुलभ हो जाता है।

षष्ठ रूप कात्यायनी

कात्यानी

अश्विन शुक्लपक्ष षष्ठी तिथि के दिन माता के षष्ठ रूप श्री कात्यायनी देवी की आराधना होती है। 

पुरातन काल से सनातन हिन्दू धर्म में शास्त्र अनुसार माता दुर्गा ही शक्ति की देवी है। इनकी ऊर्जा से समस्त ब्रह्मांड की रचना की गई जहाँ दुर्गा स्वयं प्रकृति हैं एवं शिव पुरूष हैं। परम्परात: माता के  विभिन्न रूप का संबंध सती अथवा पार्वती से है। ये ही नव दुर्गा, दसविद्या, शक्ति, चामुंडा आदि विभिन्न नामों से पूजत होती हैं। शास्त्र में नवरात्रि के माध्यम से नव दिन एवं रात्रि माता दुर्गा की पूजा व उपासना का विधि विधान बताया गया है। देवी दुर्गा हर दुखों का नाश करके भक्तों को वरदान प्रदान करने वाली देवी है। नवरात्रि में उनकी पूजा श्रद्धा, भक्ति एवं आस्था से की जाती है। देवी के नव रूप नव प्रकार की सकारात्मक शक्तियाँ प्रदान करता हैं। निष्ठा सहित उनकी आराधना करने से हर एक प्राणियों का उद्धार हो जाता है। 

नवरात्रि के प्रकार

प्रति वर्ष में चार नवरात्रि का पालन किया जाता है। इन चारों में दो गुप्त नवरात्रि हैं जो प्रधानतः साधक सम्प्रदाय के लोगों में प्रचलित है एवं दो नवरात्रि मुख्यत सभी लोग पालन करते हैं। 

चैत्र नव रात्रि

पहली नवरात्रि चैत्र प्रतिपदा से शुभारंभ होकर रामनवमी में पूर्ण होकर दशमी में समापन होती है।

शरद नव रात्रि

शरद ऋतु आश्विन मास शुक्लपक्ष में द्वितीय नवरात्र का पालन किया जाता है। नौ दिन में माता के नव रूप की आराधना पूर्ण कर शुक्ल विजया दशमी को समापन किया जाता है।

कात्यायनी

शास्त्र अनुसार महर्षि कात्यायन ने कठिन तपस्या कर माता दुर्गा को प्रसन्न किया एवं उन्हें पुत्री रूप में प्राप्त किया। महर्षि कात्यायन के गोत्र में जन्म होने पर माता का नाम कात्यायनी पड़ा।

यह रूप में माता चतुर्भुजा है तथा इनका वाहन सिंह है।

माता के हाथों में फूल है, अभय मुद्रा है, तलवार है एवं वर मुद्रा है। 

कात्यायनी माता की पूजा करने वालें भक्तों धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की सभी मनोकामनाये पूर्ण हो जाती है, और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। देवी के अधीन में “आज्ञा” चक्र है।

स्तुति मंत्र 

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।

मंत्र

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

सर्वकार्य सिद्धि हेतु नवरूप स्तोत्र

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति च अष्टमम् ।।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।

उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

फलश्रुति

माता दुर्गा की आराधना से श्रद्धालु एवं भक्तों के सारे कष्टों का निवारण अनायास ही हो जाता है यह मानना चाहिए। जगतजननी माता अपने संतानों के लिए सदा तत्पर हैं, हमें केवल उनको सच्ची भावना से पुकारना है। 

जय माँ दुर्गा। ॐ नमः शिवाय। हरे कृष्ण हरे राम।

शारदीय दुर्गापूजा एवं नौ रात्रि 2021, जाने तिथि एवं समय।

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