श्रावण पुत्रदा एकादशी तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त, ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न|Putrada Ekadashi 2021

श्रावण पुत्रदा एकादशी

Putrada Ekadashi 2021

श्रावण महीने के शुक्लपक्ष पर एकादशी तिथि पुत्रदा एकादशी एवं पवित्रा एकादशी के नाम से जानी जाती है।

एकादशी तिथि सदा ही भगवान विष्णु के प्रिय है। यह एकादशी पालन करने से संतान से जुड़े सुख दायक फल भक्तों को प्राप्त होता है, ऐसा मानना चाहिए।

संतान गोपाल अर्थात श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना करें। भगवान के आशीर्वाद से सुसंतान प्राप्त होगी ऐसा मानना चाहिए।

पुत्रदा एकादशी के मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारम्भ 

18 अगस्त 2021, 

बुधवार, 3:22 am (भोर के समय)

एकादशी व्रत पालन

18 अगस्त 2021, 

बुधवार

विशेष: व्रत के दिन एवं रात में अन्न अनाज भोजन त्याग करें। सामर्थ्य अनुसार निर्जल, केवल जल, अथवा फल, गौ दुग्ध का आहार करें।

एकादशी तिथि समाप्त

19 अगस्त 2021, 

गुरुवार, 1:08 am 

व्रत का पारण

19 अगस्त 2021, 

गुरुवार, द्वादशी तिथि,

सूर्योदय समय से 08:30 am तक।

विशेष: 

  • भगवान विष्णु की पूजा करें। माता लक्ष्मी को स्मरण करें।
  • भगवान को पूरी, हलवा, खीर का भोग निवेदन करें।
  • भगवान का प्रसाद का सेवन कर व्रत को पूर्ण करें। (अनाज भोजन का सेवन करें।)

सर्वसाधारण विधि

  • ब्रह्मुहूर्त में सय्या त्याग कर नित्य कार्य तथा स्नान आदि से निवृत होकर के शुद्ध वस्त्र धारण करना है।
  • सूर्योदय होने पर गृह मंदिर के कपाट को खोले।
  • भगवान के लिए पंच उपचार पूजा का आयोजन करें। गंगाजल, सुगंध, सफेद पुष्प, तुलसी पत्र, धूप, घी के दीप, मिष्ठान्न, पानीय जल का आयोजन करें।
  • गंगा जल से भगवान का अभिषेक करें।
  • सुगंध, तुलसी पत्र, सफेद पुष्प, धूप, दिप, मिष्ठान्न, पानीय जल निवेदन करें।
  • सभी मिष्ठान्न तथा भोग पर तुलसी पत्र डालें।
  • माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • भगवान की आरती करें, हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। यह महा मन्त्र का जप भी 108 बार करें।

विशेष:

  • तुलसी पत्र का होना अनिवार्य है।
  • श्रीविष्णु नाम, श्रीकृष्ण नाम का पाठ करें।
  • । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । महामंत्र का 108 बार पाठ करें।
  • भगवान का कीर्तन गान करें।
  • एकादशी में चावल, गेहू इत्यादि अनाज भोजन वर्ज्य है।
  • प्याज़, लहसुन, मांस, मदिरा इत्यादि सेवन वर्जित है।
  • अन्य  तामसिक भोजन का आहार वर्जित है।
  • सटीक समय हेतु स्थानीय पञ्चाङ्ग अथवा स्थानीय मंदिर के पुरोहित से सम्पर्क करें। 
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