
आरती, चालीसा, स्तोत्रम्, अष्टक और नवग्रह मंत्रों का
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ फल बेल से अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु से मुक्ति मिले, अमरत्व से वंचित न हों।
सही विधि से मंत्र जाप करें और अधिकतम फल प्राप्त करें
स्नान करके पवित्र स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मन को शांत करें।
रुद्राक्ष या तुलसी की माला धारण करें। अपने इष्ट देव का स्मरण करें और संकल्प लें।
शुद्ध उच्चारण के साथ 108 बार या निश्चित संख्या में मंत्र का जाप करें। एकाग्रता बनाए रखें।
जाप पूर्ण होने पर भगवान को प्रणाम करें और फल समर्पित करें। नियमित अभ्यास करें।
रुद्राक्षु एक दिव्य डिजिटल मंच है जो प्राचीन वैदिक मंत्रों, स्तोत्रों, चालीसाओं और आरतियों को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करता है। हमारा उद्देश्य है कि हर भक्त को शुद्ध और प्रामाणिक पवित्र ग्रंथ सरलता से उपलब्ध हों।
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