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सर्वमङ्गलमङ्गल्ये
शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि
नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमय हो। कल्याणदायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थो को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है।
सही विधि से मंत्र जाप करें और अधिकतम फल प्राप्त करें
स्नान करके पवित्र स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मन को शांत करें।
रुद्राक्ष या तुलसी की माला धारण करें। अपने इष्ट देव का स्मरण करें और संकल्प लें।
शुद्ध उच्चारण के साथ 108 बार या निश्चित संख्या में मंत्र का जाप करें। एकाग्रता बनाए रखें।
जाप पूर्ण होने पर भगवान को प्रणाम करें और फल समर्पित करें। नियमित अभ्यास करें।
रुद्राक्षु एक दिव्य डिजिटल मंच है जो प्राचीन वैदिक मंत्रों, स्तोत्रों, चालीसाओं और आरतियों को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करता है। हमारा उद्देश्य है कि हर भक्त को शुद्ध और प्रामाणिक पवित्र ग्रंथ सरलता से उपलब्ध हों।
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